सोमवार, 27 मई 2013

सप्तसिंधु-महाकाव्य

डॉ0 अनंतराम मिश्र अनंत जी नदी विषयक ज्ञान के महान वेत्ता हैं। उन्होंने अपने अथक परिश्रम से सप्तसिंधु के रूप में साहित्य जगत को एक अमूल्य निधि प्रदान की है। एक सुधी व जिज्ञासु पाठक के लिए सप्तसिंधु वास्तव में उत्तर भारत की सात नदियों सरस्वती,शतद्रु,परूष्णी,असिक्नी,वितस्ता,विपाशा तथा सिन्धु के विषय में जानकारी का अद्भुत खजानाहै।
षोडष प्रवाहों में विभक्त यह पुस्तक भारतीय संस्कृति में प्रचलित सोलह संस्कारों व श्रॄंगारों का स्मरण करा देती है।
आत्मकथात्मक शैली में रचित यह महाकाव्य उपरोक्त नदियों के ऐतिहासिक, भौगोलिक, धार्मिक, सांस्कृतिक, राजनैतिक व अर्थशास्त्रीय आदि अनेक पक्षों पर प्रकाश डालता है।
डॉ०अनन्त जी हिन्दी के साथ संस्कृत भाषा के भी विद्वान हैं इसकी झलक उनकी इस रचना में आद्योपांत दिखाई देती है।

शनिवार, 11 मई 2013

बड़े बे आबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले

ससुरे पहले इस्तीफा दे देते तो कुछ सम्मान तो बचा रहता लेकिन क्या करें ये भी बेहयाई घुट्टी में पी रखी है जी हाँ मैं अपने कानून मंत्री और रेल मंत्री की ही बात कर रहा हूँ। ये खुले आम दोषी सिद्ध हो जाने पर भी आखिरी क्षण तक कुर्सी से चिपके रहे। लगता नहीं ये वही कांग्रेस पार्टी है जो देश की आजादी के लिए लड़ी। आज अपने नेताओं के भ्रष्टा चार के बोझ तले दबी जा रही है।

रविवार, 7 अप्रैल 2013

वहशीपन



कैसा अपना देश हो गया कैसी है ये लाचारी।
वहशीपन से सहम गयी है आर्यावर्त्त की नारी।
क्यों लोगों ने भुला दिये आदर्श पुरातन अपने।
टूट रहे हैं राष्ट्रपिता ने देखे थे जो सपने।
रावण से भी नहीं हुई थी यों सीता की ख्वारी।
वहशीपन से सहम गयी है आर्यावर्त्त की नारी।
जिस गरिमा के लिये देश है सारे जग से न्यारा।
उसको धूल-धूसरित करते देकर जख्म करारा।
जिन आदर्शों की खातिर हम विश्व गुरू कहलाये।
कहाँ गये आदर्श सभी वो आकर कोई बताये।
कैसे रह पायेंगी सुरक्षित अब बेटियाँ हमारी।
वहशीपन से सहम गयी है आर्यावर्त्त की नारी।
पूजनीय नारियाँ जहाँ समझी जाती थीं अब तक।
वहीं देवियाँ अब बोलो ये जुल्म सहेंगी कब तक।
कुत्सित हुए हृदय लोगों के लज्जा जरा न आती।
अपने बेटों के कुकृत्य से माँ भारती लजाती।
रो उठती उसकी भी आत्मा घाव मिले हैं भारी।
वहशीपन से सहम गयी है आर्यावर्त्त की नारी।
फाँसी देने से व्यभिचारी सजा नहीं पायेंगे।
कुछ दिन बाद इसी घटना भूल सभी जायेंगे।
सजा दिलाओ ऐसी जिससे सबक सभी वहशी लें।
उर हों भयाक्रान्त उनके अधरों से छीन हँसी लें।
करो नपुँसक भारत में जो भी हो बलात्कारी।
तभी मुस्करा पायेगी फिर आर्यावर्त्त की नारी।
वहशीपन से सहम गयी है आर्यावर्त्त की नारी।

             अनंत राम मिश्र ग्राम-औड़ेरी, तहसील-शाहाबाद

                          जिला-हरदोई (उत्तर प्रदेश)   भारत

शनिवार, 30 मार्च 2013

द्वारिकेश



धाये धन-धाम छोड़ द्वारिका के नाथ कभी,
द्रौपदी की आन मान क्षण में बचाने को।
सुना ज्यों सुदामा मित्र द्वारिकेश द्वार खड़े,
दौड़ चले उठकर मित्रता निभाने को।
प्रण छोड़ चक्रधर धाये गंगापुत्र पर,
कुन्तिजात युद्धवीर जीवन बचाने को।
ऐसे भक्त प्रेमी भगवान को न ध्याये नित्य,
भार रूप भूमि पर जीवन बिताने को।

हमारीवाणी

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