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शुक्रवार, 19 जून 2026

जो राम रचि राखा

दो हजार ग्यारह की जनगणना में हम एक सौ इक्कीस करोड़ थे। इस समय जनगणना चल रही है मेरा अनुमान है कि इस समय हम एक सौ पचास करोड़ होंगे। लेकिन हमारा दुर्भाग्य है कि शासन चलाने के लिए हम कुछ सैकड़ा ईमानदार लोग चुन पाने में असमर्थ हैं। पिछले अस्सी वर्षों में हम अपराधियों से मुक्त नहीं हो पाये। दो हजार चौदह में एक उम्मीद बंधी थी कि भ्रष्टाचार मुक्त समाज की स्थापना में भाजपा अपना योगदान देगी। हिन्दू समाज का उत्थान बिना किसी भेदभाव के होगा। तमाम दल जो अल्पसंख्यक समुदाय को वरीयता देने के क्रम में बहुसंख्यक समाज के हितों की अनदेखी कर रहे हैं वह अब नहीं होगा। प्रारंभ में ऐसा लगा भी कि सब काम ठीक से हो रहा है। यद्यपि कुछ शिकायतें मेरी प्रारंभ से रहीं हैं जिसकी वजह से मेरे तमाम मित्र मान ही नहीं पाये कि मैं भाजपा के विरुद्ध नहीं हूं। मेरी बला से।
किन्तु बाद में जिस तरह अन्य दलों के जिताऊ कन्डीडेटों को अपने पाले में लाने के लिए भाजपा ने अपने सिद्धांतों की बलि दी और तमाम अपराधियों को पवित्र घोषित कर दिया उससे यही लगा कि, "राम तेरी गंगा मैली हो गयी पापियों के पाप धोते धोते" गाना शायद भाजपा के लिए ही लिखा गया था। हमारी समस्या यह नहीं है कि कल सत्ता में कौन आयेगा? भाजपा, सपा, बसपा या कांग्रेस कोई भी आये अधिकांश विधायक वही लोग रहेंगे? जीतें किसी पार्टी या गठबंधन से कूद फांद करके सत्ता में शामिल हो ही जायेंगे। कहने का मतलब इस लोकतंत्र में विधायक या सांसद सरकार बदलने पर भी कम ही बदलते हैं, इसलिए चाहे जिस पार्टी की सरकार बने इनका रोल नीति निर्धारण में कम ही रहता है। वर्तमान में तो नीति-निर्धारण कारपोरेट जगत से प्रभावित है कुछ चुने हुए उद्योगपति अपने फायदे के कानून बनवाने में सफल हैं जनता जाये भाड़ में। वह तो मुफ्त गल्ला और सब्सिडी लेकर मस्त है।
समस्या यह है कि चुनें किसे क्योंकि सबको चुना और आखिरी दल था भाजपा वह भी फेल हो गयी। अब "जायें तो जायें कहां?" अभी भी समय है बुलडोजर बाबा अगर राम मन्दिर में हुई दान की चोरी के मामले में कोई प्रभावी कार्रवाई करें अन्यथा किसी का हित नहीं होगा न आपका और न आप पर विश्वास करने वालों का। आप पर अविश्वास करने वालों का भी हित नहीं। फिर होगा क्या? वही जो राम रचि राखा।

नेहरू जी की गलती

मन्दिर नहीं बना था प्यारे कांग्रेस की चलती थी।
क्योंकि कृपा गांधी नेहरू की म्लेच्छ वर्ग को मिलती थी।
जय बीजेपी जय जय मोदी मन्दिर तो बनवा डाला,
किन्तु कोष में चोर घुस गये नेहरू जी की गलती थी।
भ्रष्टाचार मिटाओगे तुम इस वादे पर आये थे,
चाल तुम्हारी भी खलती है जैसे उनकी खलती थी।
तुमने खुद को गंगा समझा सब अपराधी स्वच्छ किये,
कहां गयी वैसी बीजेपी जैसी पहले मिलती थी।
मुद्दों पर मौनी बाबा है आत्मप्रशंसा लीन लबारी,
बना दिया परधान उसे यह सन चौदह की गलती थी।
विमल