बुधवार, 15 मई 2019

प्रेम और चुनाव

चुनाव और प्रेम में भी अजीब घालमेल है,
सिर्फ शब्दों, इशारों व भावनाओं का तालमेल है।
वहाँ भी चुनाव था,
यहाँ भी चुनाव है,
वहाँ न कुछ प्रभाव था,
यहाँ न कुछ प्रभाव है,
दिल खोलकर सब कह दिया,
तब भी न कुछ दुराव था,
अब भी न कुछ दुराव है।।

कृपया पोस्ट पर कमेन्ट करके अवश्य प्रोत्साहित करें|

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (17-05-2019) को "बदलाव की सुखद बयार" (चर्चा अंक- 3338) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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