शुक्रवार, 8 मार्च 2019

सत्ता का प्रभाव

कंटकों से भरे हुए, पथ में जो जाना पड़े,
पैर में पड़े जूतों से, प्यार हो ही जाता है।
जहाँ मारपीट की हों थोड़ी भी सम्भावनाएं,
हाथ में लगे तो हथियार हो ही जाता है।
पत्थरों में नाम जब खोदा नहीं जाता बन्धु,
नेताजी का खून खौल, क्षार हो ही जाता है।
सत्ता के जूते पर हो पॉलिश अहंकार की,
चोरों व उचक्कों में, रार हो ही जाता है।।

कृपया पोस्ट पर कमेन्ट करके अवश्य प्रोत्साहित करें|

4 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (10-03-2019) को "पैसेंजर रेल गाड़ी" (चर्चा अंक-3269) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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