शुक्रवार, 11 जनवरी 2019

चुनावी समर

 इस चुनावी समर का हथियार नया है।
खत्म करना था मगर विस्तार किया है।
जिन्न आरक्षण का एक दिन जाएगा निगल,
फिलहाल इसने सबपे जादू झार दिया है।
अब लगा सवर्ण को भी तुष्ट होना चाहिए।
न्याय की सद्भावना को पुष्ट होना चाहिए।
घूम फिर कर हम वहीं आते हैं बार बार,
सँख्यानुसार पदों को संतुष्ट होना चाहिए।



कृपया पोस्ट पर कमेन्ट करके अवश्य प्रोत्साहित करें|

4 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (13-01-2019) को "उत्तरायणी-लोहड़ी" (चर्चा अंक-3215) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    उत्तरायणी-लोहड़ी की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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