गुरुवार, 13 दिसंबर 2018

पन्द्रह लाख


मन्दिर बन पाया नहीं, मिले न पन्द्रह लाख।मतदाता ने भी रखा, बीजेपी को ताख।।
नए नोट की चमक सा, फीका हुआ प्रभाव।मतदाता सहलायेगा, कब तक अपने घाव।।भूल गए सब वायदे, सबका किया विकास।सबसे अधिक सवर्ण का, शासन में उपहास।।

कृपया पोस्ट पर कमेन्ट करके अवश्य प्रोत्साहित करें|

1 टिप्पणी:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (15-12-2018) को "मन्दिर बन पाया नहीं, मिले न पन्द्रह लाख" (चर्चा अंक-3186) पर भी होगी।
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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